हमारी कहानी

देसी गाय के गोमय से, घर की रोज़ की चीज़ें। हम इसे गोमय जीवन कहते हैं।


चित्र: कलात्मक कल्पना।
भोजपाल से

राजा भोज की नगरी से

शौर्यकृति भोपाल का ब्रांड है, उस शहर का, जिसके नाम में ही राजा भोज बसे हैं।

  • परमार राजा

    लगभग 1010 से 1055 ई. तक मालवा पर राज किया, राजधानी धार से।

  • विद्वान राजा

    लगभग 84 ग्रंथों का श्रेय, जिनमें वास्तु पर समरांगण सूत्रधार और योग पर राजमार्तंड शामिल हैं।

  • भोज की पाल

    मान्यता है कि उनकी बँधवाई पाल से बड़ा तालाब, यानी भोजताल बना, और “भोजपाल” ही आगे चलकर भोपाल कहलाया।

  • भोजेश्वर

    भोपाल के पास भोजपुर का विशाल शिव मंदिर उन्हीं का बनवाया हुआ है।

राजा भोज ने ज्ञान, वास्तु और जल को लोगों के जीवन से जोड़ा। उन्हीं की नगरी से, हम गायों के साथ जीने की विरासत को आज के घर से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

हज़ारों साल, गायों के साथ

भारतीय घर हमेशा गोमय के साथ जिए हैं।

गोमय जीवन क्यों


  1. गाय घर का हिस्सा थी

  2. आज, दूध बंद होते ही खूँटा खाली

  3. गोमय जीवन, आज के फ़्लैट में भी

भारत में दूध देना बंद करते ही गायों को छोड़ दिया जाता है। गोमय जीवन एक सवाल पूछता है: पूर्वजों से मिली इस विरासत को आज के फ़्लैट, सॉफ़्टवेयर और AI वाली दुनिया में कैसे जिएँ?

जब रोज़ के जीवन में गोबर का मोल होगा, तो हर गाय का मोल होगा, दूध दे या न दे।

विरासत भी बची रहेगी, हमारा जीवन भी बेहतर होगा, और उन जीवों का भी, जो हमारे साथ रहते हैं और हमें सहारा देते हैं।

गौशाला → हाथ → घर

गोमय जीवन आप तक ऐसे पहुँचता है, तीन पड़ाव में।
  1. स्थानीय गौशाला

    आस-पास की छोटी गौशालाओं से गोमय, ताकि गायों की सेवा करने वालों को सीधी आय मिले।

  2. स्थानीय हाथ

    भोपाल की स्थानीय महिलाएं हर उत्पाद हाथ से बनाती और पैक करती हैं।

  3. आपका घर

    सीधे आपके घर तक, और इस्तेमाल के बाद वापस मिट्टी में।

आज की शुरुआत

रसोई और पूजा-घर के लिए, हमारे पहले उत्पाद।

आगे क्या

रसोई, आँगन और पूजा-घर के लिए गोमय जीवन की और भी चीज़ें आ रही हैं।

मिलिए गाय से

हमारी ब्रांड तो गाय है गाय

हमारी ब्रांड एम्बेसडर “गाय” गोमय जीवन की आत्मा है: परंपरा, करुणा और शुद्धता का प्रतीक। न कोई हानिकारक रसायन, न कोई दिखावा। बस परंपरा, और घर की पवित्रता।

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